देश के चर्चित और हाईप्रोफाइल मामले
सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर की सुनवाई कर रहे सीबीआई के स्पेशल जज जस्टिस ब्रजगोपाल
हरकिशन लोया की रहस्यमयी मौत को तीन साल हो रहे हैं। इस मामले में भारतीय जनता
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह मुख्य आरोपी थे, जिन्हें बाद में बरी कर दिया गया था।
खैर, लगभग सप्ताह भर पहले ‘द
कारवां’ पत्रिका
ने जस्टिस लोया के परिजनों से बातचीत के आधार पर एक सनसनीखेज रहस्योद्घाटन करते
हुए एक लेख प्रकाशित किया। इसके तहत जस्टिस लोया की मौत पर तमाम सवाल खड़े किए गए
थे। जस्टिस लोया की बहन और पिता के हवाले से यह आरोप भी सामने आया कि चीफ जस्टिस
मोहित शाह ने कथित तौर पर अमित शाह के पक्ष में फैसला करने के एवज में 100 करोड़
रुपए का आफर किया था। ‘द
कारवां’ में आनलाइन
प्रकाशित लेख के जवाब में सोमवार को ‘इंडियन एक्सप्रेस’
ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट से जस्टिस लोया की मौत पर ‘द कारवां’
की रिपोर्ट को ही सिर से खारिज कर दिया।
अब गुजरात चुनाव की पृष्ठभूमि में ‘द कारवां’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’
की जस्टिस लोया की मौत पर अलग-अलग एंगल से प्रकाशित रिपोर्ट मामले को एक नई रोशनी
में पेश करती है। जिस देश में चुनाव के अवसर पर ही बोतल में बंद जिन्न बाहर आते
हों, वहां एक का अमित शाह को कठघरे में खड़ा करना और दूसरे का उन्हें अपरोक्ष रूप से
बचाना दिल-ओ-दिमाग को मथता जरूर है। वह भी तब जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद
केजरीवाल समेत कांग्रेस, वाम मोर्चा और दिल्ली उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस एपी
शाह जस्टिस लोया की मौत की नए सिरे से जांच की मांग कर चुके हैं। उनकी यह मांग
जस्टिस लोया की बहन और पिता के सामने आए बयानों पर ही आधारित है। हालांकि ‘द कारवां’ और ‘इंडियन
एक्सप्रेस’
की रिपोर्ट के बावजूद कुछ अनसुलझे सवाल अभी भी हैं।
मसलन,
प्रश्न- जस्टिस लोया को अस्पताल कैसे लेकर गए?
जस्टिस लोया की बहन अनुराधा बियाणी और पिता
हरकिशन लोया के मुताबिक उन्हें आए फोन के हिसाब से जस्टिस लोया को आटोरिक्शा में
डांडे अस्पताल लेकर गए। बाद में नागपुर के दूसरे अस्पताल लेकर जाया गया, जहां
उन्हें मृत घोषित किया गया।
विरोधाभास- अनुराधा के मुताबिक नागपुर के रवि
भवन के पास एक भी आटो स्टैंड नहीं है। फिर आटोरिक्शा से जस्टिस लोया को अस्पताल
कैसे लेकर गए। हालांकि मुंबई उच्च न्यायालय के जस्टिस भूषण गवई के मुताबिक स्थानीय
जज विजय कुमार बर्डे अपनी कार में जस्टिस लोया को अस्पताल लेकर गए। ‘द कारवां’ की रिपोर्ट में
बर्डे का जिक्र आया है। जस्टिस लोया की दूसरी बहन ने इस नाम के शख्स से जस्टिस
लोया की मौत का समाचार मिलने की बात कही है।
प्रश्न- ईसीजी मशीन की वस्तुस्थिति
विरोधाभास- जस्टिस लोया की बहन और पेशे से
डाक्टर अनुराधा बियाणी की ‘द
कारवां’ से
बातचीत के मुताबिक, अस्पताल की ईसीजी मशीन काम नहीं कर रही थी। हालांकि ‘इंडियन
एक्सप्रेस’
के मुताबिक ईसीजी हुआ। अखबार ने इसके समर्थन में एक ईसीजी रिपोर्ट की फोटो भी
छापी। यह अलग बात है कि उस रिपोर्ट में ब्रजमोहन लोहिया का नाम छपा है। यानी ईसीजी
का रहस्य बरकरार है।
प्रश्न- पोस्टमार्टम रिपोर्ट की बातें
विरोधाभास- ‘द कारवां’
के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जस्टिस लोया की मौत का समय सुबह 6.15 बताया
गया, जबकि उनके घर वालों के मुताबिक जस्टिस लोया की मौत की खबर उन्हें सुबह 5 बजे
ही मिल गई थी। यही नहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के प्रत्येक पन्ने पर ‘चचेरे भाई’ के तौर पर
हस्ताक्षर हैं। हालांकि ‘इंडियन
एक्सप्रेस’
की रिपोर्ट कहती है कि डाक्टर प्रशांत राठी ने उक्त हस्ताक्षर किए। उन्हें ऐसा
करने के निर्देश उनके चाचा रुक्मेश पन्नालाल जकोटिया ने दिए थे।
प्रश्न- जस्टिस लोया के शरीर पर खून के निशान
विरोधाभास- जस्टिस लोया की बहन के मुताबिक
जस्टिस लोया की कमीज और शरीर के पिछले हिस्से में खून के निशान थे। ‘द कारवां’ कहता है कि
पोस्टमार्टम में खून नहीं निकलता है, क्योंकि दिल काम करना बंद कर चुका होता है।
दोबारा पीएम कराने के सवाल पर डेडबाडी के साथ आए कुछ लोगों ने ‘मसले को और न
उलझाने’ की सलाह
दी थी। यही नहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘ड्राय’
लिखा था। ‘इंडियन
एक्सप्रेस’
ने डाक्टर के हवाले से लिखा है कि पोस्टमार्टम में खून निकलता है।
प्रश्न- जस्टिस लोया का शव अकेले भेजा गया
लातूर
विरोधाभास- ‘द कारवां’
में अनुराधा बियाणी बताती हैं कि लातूर स्थित उनके घर जस्टिस लोया का शरीर एंबुलेंस
का ड्राइवर लेकर पहुंचा था। ‘इंडियन
एक्सप्रेस’
से बातचीत में जस्टिस गवई ने बताया कि उन्होंने दो कनिष्ट जजों को साथ जाने के
निर्देश दिए थे। वे एंबुलेंस के पीछे एक कार में गए थे। रास्ते में कार में खराबी
आ जाने से वह एंबुलेंस के पहुंचने के बाद पहुंचे थे।
प्रश्न- 100 करोड़ की रिश्वत का मामला
विरोधाभास- ‘द कारवां’
के मुताबिक अनुराधा का कहना है कि मुंबई उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस मोहित शाह ने
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए 100 करोड़ की पेशकश की थी। ‘इंडियन
एक्सप्रेस’
में जस्टिस गवई के मुताबिक, मोहित शाह जस्टिस लोया की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे
थे।
उक्त तमाम सवालों और जस्टिस लोया की मौत पर दो
अलग-अलग रिपोर्ट से स्पष्ट है कि ‘द
कारवां’ की
रिपोर्ट जहां भाजपा अध्यक्ष को कठघरे में खड़ा करती है, वहीं ‘इंडियन
एक्सप्रेस’
की रिपोर्ट अमित शाह को बचाती नजर आती है। एक ऐसे देश जहां आज तक सुभाष चंद्र बोस
और लाल बहादुर शास्त्री की मौत के वास्तविक कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका
है या आधुनिक संदर्भों की बात करें तो आरुषि तलवार हत्याकांड की असल वजह सामने
नहीं आई है, वहां जस्टिस लोया की मौत एक और संदिग्ध मौत में तब्दील होकर इतिहास के
पन्ने में दर्ज हो जाएगी। बस चुनाव के मौसम में राजनीतिक दल अपने-अपने हिसाब से ‘द कारवां’ और ‘इंडियन
एक्सप्रेस’
की रिपोर्ट की व्याख्या करेंगे। और इन्हीं दोनों के हिसाब से भाजपा अध्यक्ष अमित
शाह को सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में दोषी और निर्दोष बताते रहेंगे।

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ReplyDeleteNeha Sharma
Sonia Singh Rajput
Nushrat Bharucha
Shama Sikander
Neha Malik