शशि कपूर को जब दादा साहब फाल्के पुरस्कार से
नवाजा गया, तो उनके बेटे कुणाल कपूर ने कहा था कि उन्हें यह सम्मान तो बहुत पहले
मिल जाना चाहिए था। कुणाल गलत नहीं थे। अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के नाटकों से
अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत करने वाले शशि कपूर ने कई हिट फिल्में दीं और अपने
समय के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के साथ काम करते हुए भी अपनी पहचान खोने नहीं दी। यही
नहीं, पृथ्वीराज कपूर, राज कपूर के बाद दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त करने
वाले शशि कपूर खानदान के तीसरे शख्स रहे।
जब बेचनी पड़ी स्पोर्टस कार
बहुत कम लोग जानते होंगे कि कपूर परिवार का
चश्म-ओ-चिराग होने के बावजूद शशि कपूर के जीवन में एक समय ऐसा भी आया था, जब उनके
पास पैसे नहीं थे। इस वजह से उन्हें अपनी बेहद प्रिय स्पोर्ट्स कार तक बेचनी पड़ी
थी। यह स्थिति तब आई जब साठ और सत्तर के दशक में शशि इतने व्यस्त कलाकार के थे कि
उन्हें कमिटमेंट पूरे करने के लिए एक दिन में आधा दर्जन शिफ्ट तक करनी पड़ीं।
सहायक निर्देशक बने, फिर आए अभिनय के मैदान में
शशि कपूर ने अपने बड़े बेटे कुणाल कपूर के जन्म
के बाद 1961 में ‘धर्मपुत्र’ के साथ बतौर
नायक फिल्मी पारी शुरू की। उसी साल उनकी ‘चार दिवारी’
फिल्म भी प्रदर्शित हुई। इसके पहले शशि कपूर पिता पृथ्वीराज कपूर के नाटकों में
अभिनय के अलावा सुनील दत्त की पहली फिल्म ‘पोस्ट बॉक्स 999’,
‘गेस्ट
हाउस’, ‘दुल्हा-दुल्हन’ और राज कपूर
अभिनीत ‘श्रीमान
सत्यवादी’ में
सहायक निर्देशक रह चुके थे। शशि कपूर ने अपने जीवन में लगभग 120 फिल्मों
में काम किया। इनमें से बतौर नायक 61 फिल्में कीं और 55 मल्टी स्टारर फिल्में।
इसमें अमिताभ बच्चन के साथ एक दर्जन के आसपास फिल्में कीं। इनमें भी ‘त्रिशूल’, ‘रोटी कपड़ा और
मकान’, ‘सुहाग’, ‘सिलसिला’ ‘नमक हलाल’ आदि प्रमुख हैं।
शशि कपूर ने ही ‘अजूबा’ भी निर्देशित
की थी। शशि कपूर ने हेमा मालिनी, परवीन बॉबी, राखी के साथ जोड़ी बनाई तो मौसमी
चटर्जी भी उनकी नायिका रहीं। नंदा उनकी प्रिय नायिका थीं, जिन्हें वह अपना मेंटर
भी बताते रहे।
अपने प्रोडक्शन हाउस से दीं यादगार फिल्में
1978 में शशि कपूर ने अपना प्रोडक्शन हाउस
खोला। इसके साथ ही शशि ने ‘जुनून’, ‘कलयुग’, ’36 चौरंगी लेन’, ‘विजेता’ और ‘उत्सव’ जैसी कालजयी
फिल्में दीं। 1987 के बाद से शशि कपूर ने बतौर चरित्र कलाकार कम फिल्में करनी शुरू
कर दी थीं। हालांकि वह हॉलीवुड के लोकप्रिय ‘बांड‘
पियर्स ब्रॉसनन के साथ ‘द
डिसीवर्स’ में भी
नजर आए थे। उनका हालिया यह यू कहें कि अंतिम फिल्म ‘जिन्ना’
और मर्चेंट आइवरी की ‘साइड
स्ट्रीट’ थी।
नब्बे के अंत में उन्होंने फिल्मी दुनिया से संन्यास ले लिया और फिर किसी फिल्म
में नहीं नजर आए।
परिवार के साथ बिताया हर रविवार
फिल्मी जीवन और पारिवारिक जीवन को अलग रखने में
सिद्धहस्त हो चुके शशि कपूर ने कभी भी रविवार को काम नहीं किया। यह दिन उनका
परिवार के साथ ही बीतता था। यही नहीं, परिवार के साथ कोई खलल नहीं डाले इसलिए शशि
ने कभी भी किसी मेहमान को रविवार को घर पर आमंत्रित नहीं किया। यही नहीं, अगर किसी
फिल्म की शूटिंग विदेश में या आउटडोर होनी होती तो वह कोशिश करते थे कि शूटिंग की
डेट्स बच्चों के स्कूल की छुट्टियों से मेल खा जाएं। वह भले ही रात में कितने ही
बजे क्यों न सोए हों, लेकिन हर रोज सुबह का नाश्ता उन्होंने 7.30 बजे ही किया।
शशि कपूर ने जैनिफर किंडल से लव मैरिज की थी,
जिनसे उन्हें तीन संतानें हुई कुणाल कपूर, करण कपूर और संजना कपूर। जैनिफर के साथ
मिलकर ही उन्होंने पृथ्वी थिएटर के लिए ‘शेक्सपियरवाला’
नाटक किया। आज शशि कपूर के रूप में हिंदी फिल्म उद्योग ने एक महान अभिनेता और
इंसान खो दिया।

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