Tuesday, November 21, 2017

पद्मावती का प्रदर्शन टालने का फैसला अमेरिका से आया, अब 2018 में आएगी

फिल्म को लेकर चल रही बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शनों के बीच पद्मावती का प्रदर्शन टालने का फैसला निर्देशक संजय लीला भंसाली का नहीं था। यह निर्णय फिल्म के निर्माताओं का था, जिन्होंने भंसाली को सिर्फ सूचित भर किया।
भंसाली के बेहद करीबी निजी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 'आने वाले महीनों में किसी और शुक्रवार' फिल्म को प्रदर्शित करने का फैसला उन्हें मोबाइल पर सुनाया गया। इसके जवाब में भंसाली ने सिर्फ 'ओके' कहकर फोन काट दिया। इस कॉल के साथ ही उनके लिए तय समय पर फिल्म के प्रदर्शन की लड़ाई खत्म हो गई।
'फिल्म के प्रदर्शन को टालने के संबंध में ना तो कोई सफाई भंसाली को दी गई और ना ही उन्होंने मांगी।' विवाद की इस लड़ाई में भंसाली की एक नहीं चली। अब उन्होंने पूरा मामला फिल्म के सक्षम निर्माताओं वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स के मजबूत हाथों में छोड़ दिया है। यह अलग बात है कि रविवार को इस बाबत कंपनी के अधिकृत बयान ने पद्मावती की पूरी की पूरी क्रू और स्टारकास्ट को झटका जरूर दे दिया।
चालू बयानबाजियों और राजनीति के बीच एक सवाल जरूर सिर उठा रहा है कि आखिर वायकॉम को त्वरित गति से यह निर्णय लेना क्यों पड़ा? एक सूत्र के मुताबिक एसएलबी (संजय लीला भंसाली) की ओर से रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो रूपी सफाई के बावजूद मामला शांत होते नहीं देख वायकॉम प्रबंधन की पेशानी पर बल पड़ गए। इस वीडियो में भंसाली ने न सिर्फ रानी पद्मावती की महिमा का बखान किया, बल्कि यह आश्वासन भी दिया कि फिल्म में किसी तरह से किसी भी ऐतिहासिक शख्स का अपमान नहीं किया गया है। इस सफाई के बावजूद सामने आने वाली धमकियों और चेतावनियों की आंच वायकॉम के अमेरिका स्थित मुख्यालय तक जा पहुंची।
पद्मावती की विषयवस्तु में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है कि बारंबार सफाई के बावजूद विवाद भड़कता देखकर अमेरिकी मुख्यालय ने फिल्म का प्रदर्शन टालने का फैसला कर लिया।
यही नहीं, फिल्म से जुड़े विवादों को खत्म करने की आखिरी कोशिश वास्तव में ताबूत में आखिरी कील की तरह साबित हुई। यह कोशिश रही भंसाली के प्रोडक्शन की महत्वपूर्ण सदस्य शोभा संत की अर्णब गोस्वामी, रजत शर्मा समेत कुछ पत्रकारों को फिल्म दिखाने की। इसके बाद अर्णब की अपने शो पर दिलेरी, 'मैंने फिल्म देखी है, आपने नहीं' बैकफायर कर गई। यहीं से मामला और बिगड़ गया।
अंत में सीबीएफसी प्रमुख प्रसून जोशी के बयान ने रही सही कसर पूरी कर दी। पद्मावती को लेकर तेज हो रहे विवादों से प्रसून खासे दबाव में थे। ऐसे में कुछ पत्रकारों को फिल्म दिखाना उन्हें रास नहीं आया और उन्होंने इसको लेकर अपनी नाखुशी सार्वजनिक कर दी।
सूत्र यह भी बताते हैं कि गुजरात चुनाव होने तक फिल्म का प्रदर्शन किसी सूरत में नहीं हो सकता था। ऐसे में फिल्म की पब्लिसिटी कॉस्ट भी बढ़नी तय थी। यही सभी देखकर वायकॉम के आलाकमान ने फिल्म के प्रदर्शन की तारीख बगैर किसी विलंब के टालने का फरमान जारी कर दिया।
अब क्या? सूत्र बताते हैं कि वायकॉम के नीति-निर्धारक फिलहाल किसी जल्दबाजी में नहीं है। वह स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और उसी के अनुरूप आगे का निर्णय करेंगे।

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