Monday, November 20, 2017

मथाई की आत्मकथा का 'शी' चैप्टर इंदिरा से उनके संबंधों का लेखा-जोखा था

इतिहास के गलियारे अंधेरे से भरे होते हैं। ऐसे में जब कोई एक रोशनी की किरण उनके भीतर जाती है, तो कुछ ऐसा सामने आता है जो यकीन से परे होता है। कुछ ऐसा ही हुआ जब जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव रहे एमओ मथाई की आत्मकथा 'रेमिनेसेंसिस आफ द नेहरू ऐज' 1978 में प्रकाशित हुई।
इस किताब के बाजार में आते ही देश भर का राजनीतिक माहौल अचानक से गर्म हो उठा। वजह सिर्फ यह नहीं थी कि इसमें किन-किन बातों का खुलासा किया गया था। असल वजह थी कि क्या छिपाया गया था? यह वह दौर था जब इंदिरा गांधी सत्ता से बेदखल हो चुकी थीं और आपातकाल के कारण उनके खिलाफ एक नकारात्मक माहौल जनमानस के सामने था।
इस रहस्य और उससे जुड़ी चर्चाओं को हवा दी थी इस किताब के एक चैप्टर 'शी' ने। चैप्टर के नाम पर किताब के प्रकाशक नरेंद्र कुमार का एक नोट था। इस नोट के मुताबिक 'यह चैप्टर लेखक के बेहद निजी अनुभवों का लेखा-जोखा है, जिसे उन्होंने डीएच लॉरेंस की शैली में लिखा था। साथ ही जिसे लेखक के ऐन मौके मन बदलने के कारण हटाना पड़ा।'
माना जाता है कि 'शी' नाम के इस चैप्टर में मथाई और इंदिरा गांधी के लगभग 12 साल चले अंतरंग संबंधों का लेखा-जोखा था। इन तमाम कयासों के बीच इंदिरा गांधी की अधिकृत आत्मकथा की लेखिका कैथरीन फ्रैंक ने भी स्वीकार किया था। उनके मुताबिक 'मथाई की आत्मकथा में इंदिरा गांधी के साथ उनके संबंधों का विवरण था, जिसे प्रकाशन से पहले खुद मथाई ने रोक दिया था।'
इस किस्से को और हवा तब मिली थी जब आईबी के भूतपूर्व निदेशक टीवी राजेश्वर ने करण थापर को दिए एक साक्षात्कार में कुबूल किया था कि मथाई ने उन्हें किताब का एक 'चैप्टर' दिया था, जिसे उन्होंने 1981 में इंदिरा गांधी के सुपुर्द कर दिया था।
1981 में मथाई की मौत के साथ ही उनकी आत्मकथा में दर्ज चैप्टर 'शी' का मजमूं भी दफन हो गया। हालांकि आज भी इसको लेकर कयासों का दौर जारी है।

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