‘रोहिंग्या जेहाद’ का कारनामा
रेखाइन में हिंदुओं की सामूहिक कब्र मिली है. म्यांमार सेना के मुताबिक इन हिंदुओं को रोहिंग्या मुसलमानों ने मारा है. अब जरा इस खबर के पीछे का इतिहास जानें, जो कथित ‘मानवीय’ मीडिया और भारतीय नेता देश के सामने नहीं लाए हैं. इसे संक्षेप में समझ लीजिए. रोहिंग्या मुसलमानों का मानना है कि रेखाइन में रह रहे हिंदू बौद्ध समर्थक हैं. वह उनके अलकायदा और आईएस प्रशिक्षित ‘जेहादियों’ की सूचना म्यांमार सेना तक पहुंचाते हैं. इसलिए हिंदुओं का नरसंहार काफी लंबे समय से जारी है, लेकिन फिलवक्त कुछ दिन पहले से इसमें तेजी आई है.
यहां, इस तथ्य को नजरअंदाज कर ‘धर्मनिरपेक्ष’ लोग रोहिंग्या घुसपैठियों को शरणार्थी बता उन्हें वापस नहीं भेजने की वकालत कर रहे हैं. इतिहास पर गौर करें तो 1947 में विभाजन के दौरान भी म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों ने पाकिस्तान को संदेश भेजा था कि वे उसके साथ मिलने को बेताब हैं. इस पर जिन्ना ने जब इंकार कर दिया था, तो भी उन्होंने अपनी ‘बहादुरी’ हिंदुओं पर ही उतारी थी. कुछ ऐसा ही बांग्लदेश के जन्म पर भी हुआ था.
इस पृष्ठभूमि और वर्तमान रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में ‘हाय-तौबा’ मैं एक बाद गारंटी से कह रहा हूं कि रोहिंग्या मुसलमानों के विस्थापन के जरिए अलकायदा, आईएस और पाकिस्तान की आईएसआई आतंकियों की एक नई फौज गढ़ रही है. फिलहाल में इसे ‘रोहिंग्या जेहाद’ का नाम दे रहा हूं. विस्तार से इस पर जल्द ही चर्चा करूंगा.

No comments:
Post a Comment