Tuesday, September 16, 2014

जवाहिरी या बगदादी नहीं पाकिस्तान पर नजर रखिए

अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की एकेमेडिशियन क्रिस्टीन फेयर की एक किताब है 'फाइटिंग टू द एंड: द पाकिस्तान आर्मीज वे ऑफ वॉर' इसमें उन्होंने पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी मदद और उसके एक बड़े हिस्से का प्रयोग भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए किए जाने का जिक्र किया है. यह सच भी है. इस रोशनी में पाकिस्तान में बीते लगभग तीन हफ्तों के हालात और थर्सडे को सामने आए अल कायदा के भारत में शाखा खोलने वाले वीडियो को आपस में जोड़कर भी देखा जा सकता है. अलकायदा की आधिकारिक तौर पर अफ्रीका के सहारा क्षेत्र, पूर्वी अफ्रीका, यमन और सीरिया के बाद यह पांचवी ब्रांच होगी. अल कायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी की इस घोषणा को कुछ सुरक्षा विशेषज्ञ इराक और सीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन आईएस के बढ़ते वर्चस्व के काउंटर के तौर पर भी देख रहे हैं.
ऐसा हो भी सकता है, लेकिन हम इसे हल्के में नहीं ले सकते हैं. इसलिए और भी नहीं कि वैश्विक आतंकवाद के पर्याय बने अल कायदा और आईएस को एक समय खाद-पानी पहुंचाने का काम पश्चिम खासकर अमेरिका ने ही किया था. इन्हीं बातों का जिक्र क्रिस्टीन अपनी किताब में कर चुकी हैं. अमेरिका ने सबसे पहले अफगानिस्तान में रूसी प्रभुत्व को खत्म करने के लिए अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मदद पहुंचाई. इसी तरह सीरिया में असद शासन के खिलाफ आईएस को खड़ा किया. लेकिन, बदलते वैश्विक परिदृश्य में यही दो आतंकी गुट दुनिया भर की शांति के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं.
भारत के लिए यह चुनौती समय रहते चेत जाने से जुड़ी है. जवाहिरी ने भारत में अल कायदा की ब्रांच का सरगना पकिस्तानी उग्रवादी असिम उमर को बताया है, जो शीर्ष तालिबानी नेता मुल्ला उमर को रिपोर्ट करेगा. इसी मुल्ला उमर का संबंध पाकिस्तानी तालिबानी से भी बताया जाता रहा है. असिम उमर इसके पहले २०१३ में भारतीय मुसलमानों से कथित जिहाद में शामिल होने की अपील जारी कर चुका है. अगर आईएस के भारतीय कनेक्शन की बात करें तो खुफिया एजेंसियां बता ही चुकी हैं कि महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कुछ मुसलमान युवक आईएस की ओर से इराक और सीरिया में लड़ रहे हैं. यही नहीं, कुछ दिन पहले कश्मीर में भी आईएस के समर्थन में पर्चे बांटे जाने की जानकारी सामने आई थीं.
खुफिया एजेंसियां यह भी बता चुकी हैं कि केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर के कुछ संगठन आईएस और अल कायदा के संपर्क में हैं. ये संगठन लश्कर और अल कायदा के लिए भर्ती समेत स्लीपर सेल बनाने में जुटा है. इंडियन मुजाहिदीन के मोहम्मद अहमद जरार सिद्दीबप्पा उर्फ यासीन भटकल का अल कायदा कनेक्शन किसी से छिपा नहीं है. एनआईए से पूछताछ में यासीन भटकल अल कायदा के मंसूबों के बारे में बता चुका है. ऐसे में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जवाहिरी का टेप सामने आने के बाद यूपी समेत देश में हाई अलर्ट जारी कर अच्छा ही किया है. लेकिन, यह समय सिर्फ हाई अलर्ट जारी न कर कुछ और ठोस कदम उठाने का भी है. मुंबई ब्लास्ट के बाद आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अभी भी कई खामियां देखने में आती हैं. सबसे गंभीर तो यही कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच जरूरी तालमेल का अभी भी अभाव है. जरूरी सूचनाएं एक-दूसरे को मिलने में विलंब होता है.
दूसरी गंभीर खामी है एनआईए, आईबी व रॉ समेत राज्य की खुफिया इकाइयों और फोर्स में खाली पड़े पद. उनके पास अत्याधुनिक उपकरण और हथियारों की कमी है. यह तब है जब आईएस और अल कायदा तो छोडि़ए स्थानीय अपराधी गिरोहों के पास भी काफी बेहतर हथियार हैं. इन मोर्चों पर भी तुरंत ध्यान देते हुए केंद्र समेत राज्य सरकारों को सकारात्मक कदम उठाने होंगे. साथ ही उन देशद्रोही तत्वों का भी ध्यान रखना होगा जो देश के भीतर सक्रिय रहते हुए आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाते हैं. सरहदों की सुरक्षा खासकर पाकिस्तान और नेपाल से लगी सीमा पर चौकसी बढ़ानी होगी. पाकिस्तान अपनी सीमा के साथ-साथ नेपाल सीमा का इस्तेमाल भी आतंकी तत्वों की घुसपैठ कराने में करता है.
इसके साथ ही यह समय भारत की कूटनीतिक परीक्षा का भी है. अब जब स्थापित हो चुका है कि आतंकवाद और पाकिस्तान का चोली-दामन का साथ है, तो वैश्विक मंच पर इस नापाक गठबंधन को उठाने का कोई मौका नहीं छोडऩा होगा. साथ ही संयुक्त राष्ट्र के आतंकी संगठनों के वित्तीय स्रोतों पर लगाम लगाने के निर्णय को भी अमल में लाना होगा. इसके लिए सभी देशों की मिलकर प्रयास करना होगा. गौरतलब है कि सिर्फ सऊदी अरब और पाकिस्तान ही ने संयुक्त राष्ट्र के इस निर्णय पर गंभीरता से अमल नहीं किया है.
यहां आम भारतीय भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते. केंद्र या राज्य सरकारों की आतंक के खिलाफ लड़ाई तभी जीती जा सकेगी, जब आमजन भी देश से जुड़े अपने कर्तव्यों को समझते हुए अपने आसपास की घटनाओं पर नजर रख, समय रहते सूचनाएं प्रशासन को पहुंचाए. अगर हम इतना भर कर लेते हैं तो अल कायदा या आईएस समेत किसी से भी डर का भाव मात्र भी लाने की जरूरत हमें नहीं पड़ेगी.

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